श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 11: रावण और उसके सभासदों का सभाभवन में एकत्र होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.11.21 
सा पुरी परमाकीर्णा रथकुञ्जरवाजिभि:।
सम्पतद्भिर्विरुरुचे गरुत्मद्भिरिवाम्बरम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
उस समय दौड़ते हुए रथों, हाथियों और घोड़ों से भरा हुआ वह नगर असंख्य गरुड़ों से आच्छादित आकाश के समान शोभायमान हो रहा था ॥ 21॥
 
At that time the city filled with running chariots, elephants and horses looked as beautiful as the sky covered with innumerable eagles. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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