श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 11: रावण और उसके सभासदों का सभाभवन में एकत्र होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.11.18 
समानयत मे क्षिप्रमिहैतान् राक्षसानिति।
कृत्यमस्ति महज्जाने कर्तव्यमिति शत्रुभि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘आप सब लोग यहाँ बैठे हुए सुविख्यात राक्षसों को शीघ्र ही मेरे पास बुलाएँ; क्योंकि शत्रुओं के साथ मुझे एक महान कार्य करना पड़ा है। मैं इसे भलीभाँति समझता हूँ (अतः इस विषय पर विचार करने के लिए सभा के सभी सदस्यों का यहाँ आना अत्यन्त आवश्यक है)॥18॥
 
‘You all should quickly call the well-known demons sitting here to me; because a great task has befallen me to be done with the enemies. I understand this very well (so it is very important for all the members of the assembly to come here to discuss this)’॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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