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श्लोक 6.11.16-17  |
तस्यां तु वैदूर्यमयं प्रियकाजिनसंवृतम्॥ १६॥
महत्सोपाश्रयं भेजे रावण: परमासनम्।
तत: शशासेश्वरवद्दूताँल्लघुपराक्रमान्॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| उस सभाभवन में नीलमणि का बना हुआ एक विशाल एवं उत्तम सिंहासन था, जिस पर अत्यंत कोमल चर्मवाला 'प्रियक' नामक मृग का चर्म बिछा हुआ था और उस पर एक गद्दी भी रखी हुई थी। रावण उस पर बैठा। फिर उसने अपने वेगशाली दूतों को आदेश दिया-॥16-17॥ |
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| In that assembly hall, there was a huge and excellent throne made of sapphire, on which was spread the skin of a deer called 'Priyak' with very soft skin and a cushion was also placed on it. Ravana sat on it. Then he ordered his swift messengers -॥16-17॥ |
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