श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 11: रावण और उसके सभासदों का सभाभवन में एकत्र होना  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  6.11.11-12h 
हेममञ्जरिगर्भे च शुद्धस्फटिकविग्रहे॥ ११॥
चामरव्यजने तस्य रेजतु: सव्यदक्षिणे।
 
 
अनुवाद
उसके दाएं और बाएं ओर शुद्ध क्रिस्टल के हैंडल वाले पंखे और सुनहरे मोतियों व मनकों से सजे बर्तन थे, जो बहुत सुंदर लग रहे थे।
 
On his right and left sides were fans with handles of pure crystal and dishes with golden beads and beads, looking very beautiful. 11 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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