Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.109.5: अहंकार के कारण न तो प्रहस्तने, न इन्द्रजित, न अन्य लोग, न अतिरथी कुम्भकर्ण, न अतिकायने, न नरान्तकने, और न आपने ही मेरी बातों को अधिक महत्व दिया, उसी का परिणाम सामने आया है। | ramayan सर्ग 6.109: विभीषण का विलाप और श्रीराम का उन्हें समझाकर रावण के अन्त्येष्टि संस्कार के लिये आदेश देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यन्न दर्पात् प्रहस्तो वा नेन्द्रजिन्नापरे जना:।
न कुम्भकर्णोऽतिरथो नातिकायो नरान्तक:।
न स्वयं बहु मन्येथास्तस्योदर्कोऽयमागत:॥ ५॥
अनुवाद
अहंकार के कारण न तो प्रहस्तने, न इन्द्रजित, न अन्य लोग, न अतिरथी कुम्भकर्ण, न अतिकायने, न नरान्तकने, और न आपने ही मेरी बातों को अधिक महत्व दिया, उसी का परिणाम सामने आया है।
Due to ego, neither Prahastane, nor Indrajit, nor other people, nor Atirathi Kumbhakarna, nor Atikayane, nor Narantakane, nor you yourself gave much importance to my words, the result of that has come to light.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥