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ramayan 6.109.3: हे वीर! आपकी बाजूबंदों से विभूषित दोनों विशाल भुजाएँ निश्चल हो गई हैं। आप उन्हें फैलाकर क्यों लेटे हैं? आपके मस्तक पर सूर्य के समान तेजस्वी मुकुट यहाँ फेंक दिया गया है॥3॥   |   ramayan सर्ग 6.109: विभीषण का विलाप और श्रीराम का उन्हें समझाकर रावण के अन्त्येष्टि संस्कार के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.109.3 
निक्षिप्य दीर्घौ निश्चेष्टौ भुजावङ्गदभूषितौ।
मुकुटेनापवृत्तेन भास्कराकारवर्चसा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! आपकी बाजूबंदों से विभूषित दोनों विशाल भुजाएँ निश्चल हो गई हैं। आप उन्हें फैलाकर क्यों लेटे हैं? आपके मस्तक पर सूर्य के समान तेजस्वी मुकुट यहाँ फेंक दिया गया है॥3॥
 
O brave one! Your two huge arms adorned with armlets have become motionless. Why are you lying with them spread out? The crown on your forehead which is as radiant as the Sun has been thrown here.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)