Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.109.18: आज रावण को जो गति प्राप्त हुई है, वह पूर्वकाल के महापुरुषों द्वारा बताई गई सर्वश्रेष्ठ गति है। क्षत्रिय भाव धारण करने वाले वीर पुरुषों के लिए यह बड़े आदर की बात है। यदि क्षत्रिय भाव से रहने वाला वीर पुरुष युद्ध में मारा जाए, तो वह शोक करने योग्य नहीं है; यह शास्त्रों का सिद्धान्त है।॥18॥ | ramayan सर्ग 6.109: विभीषण का विलाप और श्रीराम का उन्हें समझाकर रावण के अन्त्येष्टि संस्कार के लिये आदेश देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इयं हि पूर्वै: संदिष्टा गति: क्षत्रियसम्मता।
क्षत्रियो निहत: संख्ये न शोच्य इति निश्चय:॥ १८॥
अनुवाद
आज रावण को जो गति प्राप्त हुई है, वह पूर्वकाल के महापुरुषों द्वारा बताई गई सर्वश्रेष्ठ गति है। क्षत्रिय भाव धारण करने वाले वीर पुरुषों के लिए यह बड़े आदर की बात है। यदि क्षत्रिय भाव से रहने वाला वीर पुरुष युद्ध में मारा जाए, तो वह शोक करने योग्य नहीं है; यह शास्त्रों का सिद्धान्त है।॥18॥
‘The fate that Ravan has attained today is the best fate as told by the great men of the past. This is a matter of great respect for the brave men who have adopted the attitude of a kshatriya. If a brave man living with the attitude of a kshatriya is killed in a war, then he is not worthy of mourning; this is the principle of the scriptures.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥