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ramayan 6.109.17: ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि युद्ध में सदैव कोई विजय प्राप्त करे। वीर पुरुष या तो युद्ध में शत्रुओं के हाथों मारा जाता है, अथवा वह स्वयं शत्रुओं का संहार करता है॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.109: विभीषण का विलाप और श्रीराम का उन्हें समझाकर रावण के अन्त्येष्टि संस्कार के लिये आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.109.17 
नैकान्तविजयो युद्धे भूतपूर्व: कदाचन।
परैर्वा हन्यते वीर: परान् वा हन्ति संयुगे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि युद्ध में सदैव कोई विजय प्राप्त करे। वीर पुरुष या तो युद्ध में शत्रुओं के हाथों मारा जाता है, अथवा वह स्वयं शत्रुओं का संहार करता है॥17॥
 
‘It has never happened before that someone always gets victory in a war. A brave man is either killed by the enemies in the war or he himself kills the enemies.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)