| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 6: युद्ध काण्ड » सर्ग 108: श्रीराम के द्वारा रावण का वध » श्लोक 7-8 |
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| | | | श्लोक 6.108.7-8  | जाज्वल्यमानं वपुषा सुपुङ्खं हेमभूषितम्।
तेजसा सर्वभूतानां कृतं भास्करवर्चसम्॥ ७॥
सधूममिव कालाग्निं दीप्तमाशीविषोपमम्।
नरनागाश्ववृन्दानां भेदनं क्षिप्रकारिणम्॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | वह सम्पूर्ण भूतों के तेज से उत्पन्न हुआ था। उसमें से सूर्य के समान तेज निकल रहा था। वह सुवर्ण से विभूषित, सुन्दर पंखों से युक्त, तेजस्वी, प्रलयकाल की धुँआधार अग्नि के समान भयंकर, तेजस्वी, विषधर सर्प के समान विषैला, मनुष्य, हाथी और घोड़ों को विदीर्ण करने में समर्थ तथा शीघ्र ही लक्ष्यभेदक था। 7-8॥ | | | | He was created from the brilliance of all the ghosts. Light like the sun was emanating from it. He was adorned with gold, equipped with beautiful wings, glowing in appearance, fierce like the smoky fire of the doomsday, luminous, poisonous like a poisonous snake, capable of tearing apart humans, elephants and horses and able to quickly hit the target. 7-8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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