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श्लोक  6.108.4 
यं तस्मै प्रथमं प्रादादगस्त्यो भगवानृषि:।
ब्रह्मदत्तं महद् बाणममोघं युधि वीर्यवान्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यह वही बाण था जो महाबली अगस्त्य ऋषि ने पहले रघुनाथजी को दिया था। वह विशाल बाण ब्रह्माजी द्वारा दिया गया था और युद्ध में अचूक था।
 
This was the same arrow which the powerful sage Agastya had earlier given to Raghunathji. That huge arrow was given by Brahmaji and was infallible in war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)