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ramayan 6.108.33: श्री रामचन्द्रजी की युद्ध में विजय से सुग्रीव, विभीषण, अंगद और लक्ष्मण अपने मित्रों सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए। तत्पश्चात् सबने मिलकर विधिपूर्वक प्रतापी श्री रामजी का पूजन किया॥33॥   |   ramayan सर्ग 6.108: श्रीराम के द्वारा रावण का वध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.108.33 
ततस्तु सुग्रीवविभीषणाङ्गदा:
सुहृद्विशिष्टा: सहलक्ष्मणस्तदा।
समेत्य हृष्टा विजयेन राघवं
रणेऽभिरामं विधिनाभ्यपूजयन्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी की युद्ध में विजय से सुग्रीव, विभीषण, अंगद और लक्ष्मण अपने मित्रों सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए। तत्पश्चात् सबने मिलकर विधिपूर्वक प्रतापी श्री रामजी का पूजन किया॥33॥
 
Sugriva, Vibhishana, Angad and Lakshmana along with their friends were very happy with the victory of Shri Ramchandraji in the war. After this, all of them together worshiped the majestic Shri Ram as per the rituals. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)