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श्लोक  6.108.28 
निपपातान्तरिक्षाच्च पुष्पवृष्टिस्तदा भुवि।
किरन्ती राघवरथं दुरावापा मनोहरा॥ २८॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के रथ के ऊपर आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी, जो अत्यंत दुर्लभ एवं सुंदर थी।
 
Flowers began to rain from the sky on top of Sri Raghunath's chariot, which was rare and beautiful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)