श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 108: श्रीराम के द्वारा रावण का वध  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.108.20 
स शरो रावणं हत्वा रुधिरार्द्रकृतच्छवि:।
कृतकर्मा निभृतवत् स तूणीं पुनराविशत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रावण को मारकर वह रक्त से रंगा हुआ सुन्दर बाण अपना कार्य पूरा करके पुनः विनम्र सेवक की भाँति श्री रामचन्द्रजी के तरकस में आ गया॥20॥
 
After killing Ravana in this way, that beautiful arrow colored with blood, after completing its work, again returned to the quiver of Shri Ramchandraji like a humble servant. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)