Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.107.67: एक ओर दशरथकुमार श्री राम थे और दूसरी ओर राक्षसराज रावण था। उन दोनों में श्री रघुनाथजी को युद्ध में विजयी देखकर देवराज के सारथि महात्मा मातलि ने युद्ध में तत्पर श्री राम से शीघ्रतापूर्वक कहा- 67॥ | ramayan सर्ग 6.107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दशरथसुतराक्षसेन्द्रयोस्तयो-
र्जयमनवेक्ष्य रणे स राघवस्य।
सुरवररथसारथिर्महात्मा
रणरतराममुवाच वाक्यमाशु॥ ६७॥
अनुवाद
एक ओर दशरथकुमार श्री राम थे और दूसरी ओर राक्षसराज रावण था। उन दोनों में श्री रघुनाथजी को युद्ध में विजयी देखकर देवराज के सारथि महात्मा मातलि ने युद्ध में तत्पर श्री राम से शीघ्रतापूर्वक कहा- 67॥
On one side was Dasharatha Kumar Shri Ram and on the other side was demon king Ravana. Seeing that among them Shri Raghunath ji was victorious in the war, Mahatma Matali, the charioteer of Devraj, quickly said to the war-oriented Shri Ram - 67॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे सप्ताधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ सातवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥