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ramayan 6.107.21-22: तत्पश्चात्, रावण को युद्धस्थल में बाण चलाने में बहुत प्रयत्न करते देख, श्री रामजी ने मुस्कुराते हुए उस पर तीखे बाण चलाए और सैकड़ों-हजारों की संख्या में उन्हें छोड़ा। ॥21-22॥   |   ramayan सर्ग 6.107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  6.107.21-22 
व्यायच्छमानं तं दृष्ट्वा तत्परं रावणं रणे॥ २१॥
प्रहसन्निव काकुत्स्थ: संदधे निशितान् शरान्।
स मुमोच ततो बाणान् शतशोऽथ सहस्रश:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, रावण को युद्धस्थल में बाण चलाने में बहुत प्रयत्न करते देख, श्री रामजी ने मुस्कुराते हुए उस पर तीखे बाण चलाए और सैकड़ों-हजारों की संख्या में उन्हें छोड़ा। ॥21-22॥
 
Thereafter, seeing Ravana putting in a lot of effort in shooting arrows on the battlefield, Sri Rama smilingly aimed sharp arrows at him and released them in hundreds and thousands. ॥21-22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)