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ramayan 6.107.20-21h: अस्त्र-शस्त्रों की वह वर्षा श्री राम के रथ को छोड़कर वानर सेना पर चारों ओर से पड़ने लगी। दस मुख वाले रावण ने प्राणों का मोह त्यागकर बाणों का प्रयोग किया और आकाश को अपने बाणों से भर दिया।   |   ramayan सर्ग 6.107: श्रीराम और रावण का घोर युद्ध   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.107.20-21h 
विमुच्य राघवरथं समन्ताद् वानरे बले।
सायकैरन्तरिक्षं च चकार सुनिरन्तरम्॥ २०॥
मुमोच च दशग्रीवो नि:सङ्गेनान्तरात्मना।
 
 
अनुवाद
अस्त्र-शस्त्रों की वह वर्षा श्री राम के रथ को छोड़कर वानर सेना पर चारों ओर से पड़ने लगी। दस मुख वाले रावण ने प्राणों का मोह त्यागकर बाणों का प्रयोग किया और आकाश को अपने बाणों से भर दिया।
 
That shower of weapons fell on the monkey army from all sides except for Shri Ram's chariot. Ten-faced Ravana, giving up his attachment to life, used arrows and filled the sky with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)