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श्लोक  6.107.10 
ततो रामोऽपि संक्रुद्धश्चापमाकृष्य वीर्यवान्।
कृतप्रतिकृतं कर्तुं मनसा सम्प्रचक्रमे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तब पराक्रमी श्री राम क्रोधित हो गए और उन्होंने अपना धनुष खींच लिया तथा रावण के कृत्य का बदला लेने के लिए उसकी ध्वजा को काटने का विचार किया।
 
Then the mighty Sri Rama became angry and drew his bow and thought of taking revenge for Ravana's act by cutting down his flag.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)