श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.106.27 
गृध्रैरनुगताश्चास्य वमन्त्यो ज्वलनं मुखै:।
प्रणेदुर्मुखमीक्षन्त्य: संरब्धमशिवं शिवा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रावण के क्रोधी मुख को देखकर और मुख से अग्नि उगलते हुए सियार अशुभ वचन बोल रहे थे और उनके पीछे गिद्धों के झुंड मंडरा रहे थे॥27॥
 
Looking at the furious face of Ravana and spitting fire from their mouths, the jackals were uttering ominous words and flocks of vultures were hovering behind them.॥27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)