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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन
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श्लोक 25
श्लोक
6.106.25
रावणश्च यतस्तत्र प्रचचाल वसुंधरा।
रक्षसां च प्रहरतां गृहीता इव बाहव:॥ २५॥
अनुवाद
रावण जहाँ-जहाँ जाता, वहाँ-वहाँ की भूमि हिलने लगती। आक्रमण करते समय राक्षसों की भुजाएँ ऐसी निकम्मी हो जातीं, मानो किसी ने उन्हें पकड़ लिया हो॥ 25॥
Wherever Ravana went, the ground there started shaking. While attacking, the arms of the demons became so useless, as if someone had caught them.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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