vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन
»
श्लोक 23
श्लोक
6.106.23
संध्यया चावृता लङ्का जपापुष्पनिकाशया।
दृश्यते सम्प्रदीप्तेव दिवसेऽपि वसुंधरा॥ २३॥
अनुवाद
जपा (हिदाहूल) पुष्प के समान लाल रंग की संध्या से आच्छादित लंकापुरी की भूमि असमय ही दिन में जलती हुई प्रतीत हो रही थी।
The land of Lankapuri, enveloped in the dusk of red colour like that of the Japa (Hidahool) flower, appeared burning even during the day, untimely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×