श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.106.17 
धर्षणामर्षितो रामो धैर्यं रोषेण लम्भयन्।
जग्राह सुमहावेगमैन्द्रं युधि शरासनम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उसके इस आक्रमण से श्री रामचन्द्रजी क्रोधित हो गए। तब उन्होंने क्रोध और धैर्य को वश में करके युद्धस्थल में इन्द्र का धनुष हाथ में लिया, जो अत्यंत शक्तिशाली था॥17॥
 
This attack of his enraged Shri Ramchandraji. Then, having controlled his anger as well as patience, he took up Indra's bow in his hand on the battlefield, which was extremely powerful.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)