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ramayan 6.106.11: 'अतः अब तुम सावधान होकर शत्रु के रथ की ओर बढ़ो। जैसे वायु प्रचण्ड बादलों को तितर-बितर कर देती है, वैसे ही आज मैं शत्रु के रथ को नष्ट करना चाहता हूँ।॥11॥   |   ramayan सर्ग 6.106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 106: रावण के रथ को देख श्रीराम का मातलि को सावधान करना, रावण की पराजय के सूचक उत्पातों तथा राम की विजय सूचित करनेवाले शुभ शकुनों का वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.106.11 
तदप्रमादमातिष्ठ प्रत्युद‍्गच्छ रथं रिपो:।
विध्वंसयितुमिच्छामि वायुर्मेघमिवोत्थितम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'अतः अब तुम सावधान होकर शत्रु के रथ की ओर बढ़ो। जैसे वायु प्रचण्ड बादलों को तितर-बितर कर देती है, वैसे ही आज मैं शत्रु के रथ को नष्ट करना चाहता हूँ।॥11॥
 
‘So now you be alert and proceed towards the enemy's chariot. Just as the wind scatters the raging clouds, in the same way today I want to destroy the enemy's chariot.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)