Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.105.31: उस समय देवताओं के बीच खड़े हुए भगवान सूर्य ने प्रसन्नतापूर्वक श्री रामचंद्रजी की ओर देखा और रात्रिराज रावण के विनाश का समय निकट जानकर हर्षपूर्वक कहा - 'रघुनंदन! अब शीघ्रता करो'॥31॥ | ramayan सर्ग 6.105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय देवताओं के बीच खड़े हुए भगवान सूर्य ने प्रसन्नतापूर्वक श्री रामचंद्रजी की ओर देखा और रात्रिराज रावण के विनाश का समय निकट जानकर हर्षपूर्वक कहा - 'रघुनंदन! अब शीघ्रता करो'॥31॥
At that time, Lord Surya, who was standing among the gods, looked at Shri Ramchandraji happily and knowing that the time of destruction of the night king Ravana was near, said with joy - 'Raghunandan! Now hurry up' 31॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे पञ्चाधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ पाँचवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥