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ramayan 6.105.26: अतः तुम एकाग्र मन से इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्यहृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजयी होगे॥26॥   |   ramayan सर्ग 6.105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.105.26 
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्।
एतत् त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम एकाग्र मन से इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्यहृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजयी होगे॥26॥
 
Therefore, you should worship this Devadhidev Jagdishwar with a concentrated mind. By chanting this Aditya Hridaya thrice you will be victorious in the war. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)