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ramayan 6.105.25: हे राघव! जो कोई विपत्ति, दुःख, कठिन मार्ग या अन्य किसी भय के समय सूर्यदेव का नाम जपता है, उसे दुःख नहीं भोगना पड़ता॥ 25॥   |   ramayan सर्ग 6.105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.105.25 
एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च।
कीर्तयन् पुरुष: कश्चिन्नावसीदति राघव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे राघव! जो कोई विपत्ति, दुःख, कठिन मार्ग या अन्य किसी भय के समय सूर्यदेव का नाम जपता है, उसे दुःख नहीं भोगना पड़ता॥ 25॥
 
Raghava! Whoever chants the name of the Sun God during times of adversity, pain, difficult path or any other fear does not have to suffer.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)