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ramayan 6.105.20: आप अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाले, जड़ता और शीत का नाश करने वाले तथा शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। आपका स्वरूप अपरिमेय है। आप कृतघ्नों का नाश करने वाले, समस्त ज्योतियों के स्वामी और साक्षात् भगवान हैं; मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ 20॥   |   ramayan सर्ग 6.105: अगस्त्य मुनि का श्रीराम को विजय के लिये “आदित्यहृदय” के पाठ की सम्मति देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.105.20 
तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नम:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आप अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाले, जड़ता और शीत का नाश करने वाले तथा शत्रुओं का नाश करने वाले हैं। आपका स्वरूप अपरिमेय है। आप कृतघ्नों का नाश करने वाले, समस्त ज्योतियों के स्वामी और साक्षात् भगवान हैं; मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ 20॥
 
‘You are the destroyer of ignorance and darkness, the destroyer of inertia and cold, and the destroyer of enemies. Your form is immeasurable. You are the destroyer of the ungrateful, the master of all lights, and are the embodiment of God; I salute you.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)