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ramayan 6.104.5: ‘अनार्य! आज तुमने मेरे उस यश, पराक्रम, यश और आत्मविश्वास को नष्ट कर दिया है, जो मैंने दीर्घकाल में अर्जित किया था।’॥5॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.104.5 
त्वयाद्य हि ममानार्य चिरकालमुपार्जितम्।
यशो वीर्यं च तेजश्च प्रत्ययश्च विनाशित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘अनार्य! आज तुमने मेरे उस यश, पराक्रम, यश और आत्मविश्वास को नष्ट कर दिया है, जो मैंने दीर्घकाल में अर्जित किया था।’॥5॥
 
‘Anarya! Today you have destroyed the fame, valour, glory and confidence that I had earned over a long period of time. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)