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ramayan 6.104.4: तुमने मेरी उपेक्षा क्यों की और मेरा आशय जाने बिना ही मेरे रथ को शत्रुओं से दूर क्यों हटा दिया?॥4॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.104.4 
किमर्थं मामवज्ञाय मच्छन्दमनवेक्ष्य च।
त्वया शत्रुसमक्षं मे रथोऽयमपवाहित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तुमने मेरी उपेक्षा क्यों की और मेरा आशय जाने बिना ही मेरे रथ को शत्रुओं से दूर क्यों हटा दिया?॥4॥
 
Why did you disregard me and move my chariot away from the enemy without knowing what I meant?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)