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ramayan 6.104.27: रावण की आज्ञा पाकर सारथी ने तुरन्त अपना घोड़ा दौड़ाया और क्षण भर में राक्षसराज का विशाल रथ युद्धभूमि के मुहाने पर श्री राम के पास पहुँच गया।   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.104.27 
ततो द्रुतं रावणवाक्यचोदित:
प्रचोदयामास हयान् स सारथि:।
स राक्षसेन्द्रस्य ततो महारथ:
क्षणेन रामस्य रणाग्रतोऽभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
रावण की आज्ञा पाकर सारथी ने तुरन्त अपना घोड़ा दौड़ाया और क्षण भर में राक्षसराज का विशाल रथ युद्धभूमि के मुहाने पर श्री राम के पास पहुँच गया।
 
On Ravana's command the charioteer immediately drove his horse. Then in a moment the huge chariot of the demon king reached near Shri Rama at the mouth of the battle field.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे चतुरधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ चारवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)