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ramayan 6.104.25: सूत! अब तुम शीघ्रता से इस रथ को राम के सामने ले चलो। रावण युद्ध में अपने शत्रुओं का वध किए बिना घर नहीं लौटेगा।॥25॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  6.104.25 
रथं शीघ्रमिमं सूत राघवाभिमुखं नय।
नाहत्वा समरे शत्रून् निवर्तिष्यति रावण:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
सूत! अब तुम शीघ्रता से इस रथ को राम के सामने ले चलो। रावण युद्ध में अपने शत्रुओं का वध किए बिना घर नहीं लौटेगा।॥25॥
 
Suta! Now you quickly take this chariot in front of Rama. Ravana will not return home without killing his enemies in the battle.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)