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ramayan 6.104.21: तुम्हें और रथ के घोड़ों को विश्राम देने तथा उनका दुःख दूर करने के लिए मैंने जो कुछ किया है, वह सर्वथा उचित है ॥ 21॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.104.21 
तव विश्रामहेतोस्तु तथैषां रथवाजिनाम्।
रौद्रं वर्जयता खेदं क्षमं कृतमिदं मया॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें और रथ के घोड़ों को विश्राम देने तथा उनका दुःख दूर करने के लिए मैंने जो कुछ किया है, वह सर्वथा उचित है ॥ 21॥
 
Whatever I have done to give you and the chariot's horses some rest and to relieve their sorrow is entirely appropriate. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)