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ramayan 6.104.2-3: हे मूर्ख! क्या तूने मुझे साहसहीन, असमर्थ, पुरुषार्थहीन, कायर, क्षुद्र, धैर्यहीन, उदासीन, प्रेमहीन और शस्त्रविद्या से रहित समझ लिया है और मेरी उपेक्षा करके मन से जो चाहे कर रहा है? (मुझसे पूछा क्यों नहीं?) 2-3॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  6.104.2-3 
हीनवीर्यमिवाशक्तं पौरुषेण विवर्जितम्।
भीरुं लघुमिवासत्त्वं विहीनमिव तेजसा॥ २॥
विमुक्तमिव मायाभिरस्त्रैरिव बहिष्कृतम्।
मामवज्ञाय दुर्बुद्धे स्वया बुद्धॺा विचेष्टसे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! क्या तूने मुझे साहसहीन, असमर्थ, पुरुषार्थहीन, कायर, क्षुद्र, धैर्यहीन, उदासीन, प्रेमहीन और शस्त्रविद्या से रहित समझ लिया है और मेरी उपेक्षा करके मन से जो चाहे कर रहा है? (मुझसे पूछा क्यों नहीं?) 2-3॥
 
You idiot! Have you considered me to be devoid of courage, incapable, devoid of effort, timid, mean, patient, listless, devoid of love and devoid of knowledge of weapons, and by ignoring me, you are doing whatever you want with your mind (Why didn't you ask me?) 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)