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ramayan 6.104.17: 'इसके अतिरिक्त यदि इस समय जो लक्षण मेरे सामने प्रकट हो रहे हैं, वे फलित हों, तो उनमें मैं अपना दुर्भाग्य ही देखूँगा ॥17॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.104.17 
निमित्तानि च भूयिष्ठं यानि प्रादुर्भवन्ति न:।
तेषु तेष्वभिपन्नेषु लक्षयाम्यप्रदक्षिणम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'इसके अतिरिक्त यदि इस समय जो लक्षण मेरे सामने प्रकट हो रहे हैं, वे फलित हों, तो उनमें मैं अपना दुर्भाग्य ही देखूँगा ॥17॥
 
‘Apart from that, if the signs which are appearing before me at this moment come to fruition, then I will only see my misfortune in them. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)