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ramayan 6.104.16: मेरे घोड़े भी रथ खींचते-खींचते थक गए थे। उनके पैर लड़खड़ा रहे थे। वे गर्मी से पीड़ित होकर वर्षा से मारी गई गायों के समान व्याकुल हो रहे थे॥16॥   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.104.16 
रथोद्वहनखिन्नाश्च भग्ना मे रथवाजिन:।
दीना घर्मपरिश्रान्ता गावो वर्षहता इव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मेरे घोड़े भी रथ खींचते-खींचते थक गए थे। उनके पैर लड़खड़ा रहे थे। वे गर्मी से पीड़ित होकर वर्षा से मारी गई गायों के समान व्याकुल हो रहे थे॥16॥
 
‘My horses too were tired of pulling the chariot. Their legs were faltering. They were suffering from the heat and were as distressed as cows killed by rain.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)