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ramayan 6.104.15: उस समय मैंने सोचा था कि तुम महायुद्ध के कारण थक गए हो। मैंने यह नहीं देखा कि तुम शत्रु से अधिक शक्तिशाली हो, मैंने तुममें कोई विशेष वीरता नहीं देखी।   |   ramayan सर्ग 6.104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 104: रावण का सारथि को फटकारना और सारथि का अपने उत्तर से रावण को संतुष्ट करके उसके रथ को रणभूमि में पहुँचाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.104.15 
श्रमं तवावगच्छामि महता रणकर्मणा।
नहि ते वीर्यसौमुख्यं प्रकर्षं नोपधारये ॥ १ ५॥
 
 
अनुवाद
उस समय मैंने सोचा था कि तुम महायुद्ध के कारण थक गए हो। मैंने यह नहीं देखा कि तुम शत्रु से अधिक शक्तिशाली हो, मैंने तुममें कोई विशेष वीरता नहीं देखी।
 
At that time I thought that you were tired due to the great war. I did not see that you were stronger than the enemy, I did not find much valour in you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)