श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 103: श्रीराम का रावण को फटकारना और उनके द्वार घायल किये गये रावण को सारथि का रणभूमि से बाहर ले जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.103.31 
रथं च तस्याथ जवेन सारथि-
र्निवार्य भीमं जलदस्वनं तदा।
जगाम भीत्या समरान्महीपतिं
निरस्तवीर्यं पतितं समीक्ष्य॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अपने राजा को रथ पर शक्तिहीन पड़ा देख रावण का सारथि मेघ के समान गर्जना करता हुआ अपना भयंकर रथ पीछे मोड़कर भयभीत होकर उसके साथ युद्धभूमि से भाग गया।
 
Seeing his king lying powerless on the chariot, Ravana's charioteer turned back his fearsome chariot making a roar like that of a cloud and fled from the battle-field along with him in fear.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे त्र्यधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ तीनवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०३॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)