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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.102.70 
स रामबाणैरतिविद्धगात्रो
निशाचरेन्द्र: क्षतजार्द्रगात्र:।
जगाम खेदं च समाजमध्ये
क्रोधं च चक्रे सुभृशं तदानीम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जब श्री रामचन्द्र के बाणों से उसका सम्पूर्ण शरीर बुरी तरह घायल होकर रक्त से लहूलुहान हो गया, तब राक्षसराज रावण उस युद्धभूमि में अत्यन्त दुःखी हुआ और उसने अत्यन्त क्रोध प्रकट किया।
 
When his entire body was badly injured and bleeding due to the arrows of Shri Ramchandra, then the demon king Ravana felt very sad on that battlefield. At the same time, he expressed great anger.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्वॺधिकशततम: सर्ग: ॥ १ ०२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें एक सौ दोवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ०२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)