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ramayan 6.102.63: जब श्री रघुनाथजी ने देखा कि मेरा भाला आकाश में भाले का स्पर्श करते ही राख के ढेर में बदल गया है, तब वे अत्यन्त क्रोधित हुए॥63॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  6.102.63 
तान् दृष्ट्वा भस्मसाद्भूतान् शूलसंस्पर्शचूर्णितान्।
सायकानन्तरिक्षस्थान् राघव: क्रोधमाहरत् ॥ ६ ३॥
 
 
अनुवाद
जब श्री रघुनाथजी ने देखा कि मेरा भाला आकाश में भाले का स्पर्श करते ही राख के ढेर में बदल गया है, तब वे अत्यन्त क्रोधित हुए॥63॥
 
When Sri Raghunath saw that my spear had turned into a heap of ashes on touching the spear in the sky, he became very angry. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)