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ramayan 6.102.61: श्री रघुनाथजी ने अपनी ओर आते हुए भाले को बाणों के समूह से रोकने का प्रयास किया, ठीक उसी प्रकार जैसे भगवान इंद्र बादलों द्वारा बरसाए गए जल से प्रलय की बढ़ती हुई आग को बुझाने का प्रयास करते हैं।   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.102.61 
आपतन्तं शरौघेण वारयामास राघव:।
उत्पतन्तं युगान्ताग्निं जलौघैरिव वासव:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी ने अपनी ओर आते हुए भाले को बाणों के समूह से रोकने का प्रयास किया, ठीक उसी प्रकार जैसे भगवान इंद्र बादलों द्वारा बरसाए गए जल से प्रलय की बढ़ती हुई आग को बुझाने का प्रयास करते हैं।
 
Sri Raghunatha tried to stop the spear coming towards him with a group of arrows, in the same way as Lord Indra tries to douse the rising fire of destruction with the water poured down by the clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)