श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  6.102.57 
रक्षसामद्य शूराणां निहतानां चमूमुखे।
त्वां निहत्य रणश्लाघिन् करोमि तरसा समम्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे युद्ध की इच्छा रखने वाले राघव! आज मैं तुम्हें मारकर तुम्हारी वही दशा करूँगा जो उन वीर राक्षसों की हुई थी जो सेना के आगे मारे गए थे॥57॥
 
O Raghava who desires war! Today after killing you I will make you suffer the same fate as those valiant Rakshasas who were killed at the front of the army.॥ 57॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)