श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  6.102.54 
अतिकायस्य नादेन तेन तस्य दुरात्मन:।
सर्वभूतानि वित्रेसु: सागरश्च प्रचुक्षुभे॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उस विशाल, दुष्टात्मा राक्षस की गर्जना से समस्त प्राणी काँप उठे और समुद्र भी व्याकुल हो उठा ॥54॥
 
Due to the roar of that huge, evil-spirited demon, all creatures trembled and even the ocean became agitated. ॥ 54॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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