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ramayan 6.102.53: उस समय राक्षसराज रावण की भयंकर गर्जना से पृथ्वी, आकाश, सम्पूर्ण दिशाएँ और अन्तरदिशाएँ हिल उठीं ॥ 53॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.102.53 
पृथिवीं चान्तरिक्षं च दिशश्च प्रदिशस्तथा।
प्राकम्पयत् तदा शब्दो राक्षसेन्द्रस्य दारुण:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उस समय राक्षसराज रावण की भयंकर गर्जना से पृथ्वी, आकाश, सम्पूर्ण दिशाएँ और अन्तरदिशाएँ हिल उठीं ॥ 53॥
 
At that time, the terrifying roar of the demon king Ravana shook the earth, the sky, all directions and the sub-directions. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)