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ramayan 6.102.5: श्री रघुनाथजी भूमि पर खड़े हैं और राक्षस रथ पर बैठा है, ऐसी स्थिति में इन दोनों का युद्ध बराबर नहीं है।’ वहाँ आकाश में खड़े देवता, गन्धर्व और किन्नर इस प्रकार बातें करने लगे।   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.102.5 
भूमौ स्थितस्य रामस्य रथस्थस्य स रक्षस:।
न समं युद्धमित्याहुर्देवगन्धर्वकिंनरा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी भूमि पर खड़े हैं और राक्षस रथ पर बैठा है, ऐसी स्थिति में इन दोनों का युद्ध बराबर नहीं है।’ वहाँ आकाश में खड़े देवता, गन्धर्व और किन्नर इस प्रकार बातें करने लगे।
 
Sri Raghunathji is standing on the ground and the demon is sitting on the chariot, in such a situation the fight between these two is not equal' the Gods, Gandharvas and Kinnars standing there in the sky started talking like this. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)