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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना
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श्लोक 45
श्लोक
6.102.45
ऊचु: सुरासुरा: सर्वे तदा विग्रहमागता:।
प्रेक्षमाणा महायुद्धं वाक्यं भक्त्या प्रहृष्टवत्॥ ४५॥
अनुवाद
उस अवसर पर युद्ध देखने आये हुए सभी देवता और दानव उस महान् युद्ध को देखकर हर्षित होकर भक्तिपूर्वक बातें करने लगे ॥ 45॥
On that occasion all the Gods and Demons who had come to witness the war, seeing that great battle, began talking joyfully and with devotion. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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