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ramayan 6.102.42: श्री रामचन्द्रजी का अत्यंत क्रोधित और भयंकर उत्पात से युक्त रूप देखकर सब प्राणी भयभीत हो गए और रावण के भीतर भी भय व्याप्त हो गया॥42॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.102.42 
रामं दृष्ट्वा सुसंक्रुद्धमुत्पातांश्चैव दारुणान्।
वित्रेसु: सर्वभूतानि रावणस्याभवद् भयम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी का अत्यंत क्रोधित और भयंकर उत्पात से युक्त रूप देखकर सब प्राणी भयभीत हो गए और रावण के भीतर भी भय व्याप्त हो गया॥42॥
 
Seeing the appearance of Shri Ramchandraji very angry and with terrible mischief, all the living beings got scared and fear spread within Ravana also. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)