श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.102.41 
खराश्च खरनिर्घोषा गगने परुषा घना:।
औत्पातिकाश्च नर्दन्त: समन्तात् परिचक्रमु:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
आकाश में चारों ओर गधे के आकार के सूखे बादल, जो विनाश का संकेत दे रहे थे, चक्कर लगाने और गर्जना करने लगे।
 
All around in the sky, dry clouds, shaped like donkeys, indicating havoc, began to circle and roar.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)