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ramayan 6.102.37-38h: राक्षस रावण के बाणों से बार-बार घायल होने के कारण, भगवान राम युद्ध की दहलीज पर अपने योद्धाओं पर निशाना साधने में असमर्थ थे। 37 1/2   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 37-38h
 
 
श्लोक  6.102.37-38h 
निरस्यमानो रामस्तु दशग्रीवेण रक्षसा॥ ३७॥
नाशक्नोदभिसंधातुं सायकान् रणमूर्धनि।
 
 
अनुवाद
राक्षस रावण के बाणों से बार-बार घायल होने के कारण, भगवान राम युद्ध की दहलीज पर अपने योद्धाओं पर निशाना साधने में असमर्थ थे। 37 1/2
 
Being repeatedly hit by the arrows of the demon Ravana, Lord Rama was unable to target his warriors at the threshold of the battle. 37 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)