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ramayan 6.102.36-37h: उस समय दस सिर और बीस भुजाओं वाला तथा हाथों में धनुष लिए हुए दशग्रीव रावण मैनाक पर्वत के समान शोभा पा रहा था।   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  6.102.36-37h 
दशास्यो विंशतिभुज: प्रगृहीतशरासन:॥ ३६॥
अदृश्यत दशग्रीवो मैनाक इव पर्वत:।
 
 
अनुवाद
उस समय दस सिर और बीस भुजाओं वाला तथा हाथों में धनुष लिए हुए दशग्रीव रावण मैनाक पर्वत के समान शोभा पा रहा था।
 
At that time Dashagriva Ravana with ten heads and twenty arms and holding a bow in his hands looked like the Mainak mountain. 36 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)