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ramayan 6.102.33-34h: समुद्र जलने लगा। उसकी लहरों से धुआँ उठने लगा और वह क्रोधित होकर ऊपर की ओर बढ़ने लगी, मानो सूर्यदेव को छूना चाहती हो। 33 1/2   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  6.102.33-34h 
सधूमपरिवृर्त्तोमि: प्रज्वलन्निव सागर:॥ ३३॥
उत्पपात तदा क्रुद्ध: स्पृशन्निव दिवाकरम्।
 
 
अनुवाद
समुद्र जलने लगा। उसकी लहरों से धुआँ उठने लगा और वह क्रोधित होकर ऊपर की ओर बढ़ने लगी, मानो सूर्यदेव को छूना चाहती हो। 33 1/2
 
The sea began to burn. Smoke began to rise from its waves and it became angry and began to move upwards as if it wanted to touch the Sun God. 33 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)