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ramayan 6.102.29-30h: तत्पश्चात् रावण ने इन्द्र के रथ की ध्वजा को लक्ष्य करके बाण चलाया और उस ध्वजा को काट डाला। उस कटी हुई स्वर्णमयी ध्वजा को रथ के ऊपर से नीचे गिराकर रावण ने अपने बाणों के जाल से इन्द्र के घोड़ों को भी क्षत-विक्षत कर दिया। 29 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 102: इन्द्र के भेजे हुए रथ पर बैठकर श्रीराम का रावण के साथ युद्ध करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  6.102.29-30h 
चिच्छेद केतुमुद्दिश्य शरेणैकेन रावण:।
पातयित्वा रथोपस्थे रथात् केतुं च काञ्चनम्॥ २९॥
ऐन्द्रानपि जघानाश्वान् शरजालेन रावण:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रावण ने इन्द्र के रथ की ध्वजा को लक्ष्य करके बाण चलाया और उस ध्वजा को काट डाला। उस कटी हुई स्वर्णमयी ध्वजा को रथ के ऊपर से नीचे गिराकर रावण ने अपने बाणों के जाल से इन्द्र के घोड़ों को भी क्षत-विक्षत कर दिया। 29 1/2॥
 
Thereafter Ravana aimed at the flag of Indra's chariot and shot an arrow and cut that flag. By dropping that cut golden flag from the top of the chariot to its lower part, Ravana mutilated even Indra's horses with his web of arrows. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)